मूल शांति:

कुल २७ नक्षत्रों में से ६ नक्षत्र मूल दोष करक माने गए हैं। ये नक्षत्र अश्विनी, आश्लेषा, मद्या, ज्येष्ठा, रेवती के रूप में जाने जाते है। इनमे से किसी नक्षत्र में जन्मा जातक, कई तरह की व्याधियों व कठिनाइयों से ग्रस्त रहता है। सतत मानसिक अस्थिरता व अनिश्चय इसका प्रमुख परिणाम है।

कैसे बनता है:

उपरोक्त बताये गए ६ नक्षत्रों में से किसी एक में जन्म।

लाक्षणिक संकेत:
१/ कार्यों का अपूर्ण रहना।
२/ आकस्मिक या अनावश्यक क्रोध
३/ अकारण दुर्घटन्ना अवं चोट
४/ अस्थिर चित्त अवं अंतर्द्वंद
५/ उग्र मन – भिन्नता

निवारण के उपाय:

२७ वैदिक आचार्यों द्वारा विहित पूजा अनुष्ठान।

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